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"Om Hreem Shreem Lakshmyai Namah"

Drishya Siddhant based Panchang
ग्रह शांति रत्न राशि के अनुसार
| नाम का पहला अक्षर | राशि | राशि स्वामी | रंग | रत्न | उपरत्न | वजन | धातु | अंगुली | दिन | समय | बीज मंत्र | जप संख्या | दान सामग्री |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ | मेष | मंगल | लाल | मूंगा | लाल गारनेट | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, तांबा, चाँदी | अनामिका | मंगलवार | प्रातः 5 से 10 बजे | ॐ अं अंगारकाय नमः | 19,000 | गेहूं, मसूर, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र |
| इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो | वृष | शुक्र | सफेद | हीरा | ओपल, सफेद पुखराज, जरकन | 21, 41, 51 सेन्ट या सवा रत्ती | चाँदी, सोना, प्लैटिनम | मध्यमा | शुक्रवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ शुं शुक्राय नमः | 16,000 | चावल, चाँदी, घी, सफेद वस्त्र |
| क, की, कू, घ, ड़, छ, के, को, ह | मिथुन | बुध | हरा | पन्ना | फिरोजा, ओनेक्स, मरगज | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, चाँदी, पंचधातु | कनिष्टिका | बुधवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ बुं बुधाय नमः | 9,000 | मूंग, कस्तूरी, कांसा, हरे वस्त्र |
| ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो | कर्क | चंद्र | सफेद | मोती | सफेद मूंगा, मूनस्टोन | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, चाँदी | कनिष्टिका | सोमवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ सों सोमाय नमः | 11,000 | चावल, चीनी, चाँदी, सफेद वस्त्र |
| म, मी, मू, मो, टा, टी, टू, टे | सिंह | सूर्य | लाल | माणिक्य | गारनेट | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | चाँदी, सोना, तांबा | अनामिका | रविवार | प्रातः 5 से 10 बजे | ॐ घृणि: सूर्याय: नमः | 7,000 | गेहूँ, गुड़, लाल चंदन, लाल वस्त्र |
| टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो | कन्या | बुध | हरा | पन्ना | फिरोजा, ओनेक्स, मरगज | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, चाँदी पंचधातु | कनिष्टिका | बुधवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ बुं बुधाय नमः | 9,000 | मूंग, कस्तूरी, कांसा, हरे वस्त्र |
| रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते | तुला | शुक्र | सफेद | हीरा | ओपल, सफेद पुखराज, जरकन | 21, 41, 51 सेन्ट या सवा रत्ती | चाँदी, सोना प्लैटिनम | मध्यमा | शुक्रवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ शुं शुक्राय नमः | 16,000 | चावल, चाँदी, घी, सफेद वस्त्र |
| तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू | वृश्चिक | मंगल | लाल | मूंगा | लाल गारनेट | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, तांबा, चाँदी | अनामिका | मंगलवार | प्रातः 5 से 10 बजे | ॐ अं अंगारकाय नमः | 10,000 | गेहूँ, मसूर, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र |
| ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे | धनु | गुरु | पीला | पुखराज | टोपाज सुनहला | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, चाँदी पंचधातु | तर्जनी | गुरुवार | प्रातः 5 से 10 बजे | ॐ बृं ब्राहस्पतये नमः | 19,000 | चने की दाल, हल्दी, पीला वस्त्र |
| भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी | मकर | शनि | नीला | नीलम | नीली, जामुनिया, लजावर्त | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | चाँदी, प्लैटिनम | मध्यमा | शनिवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ शं शनैश्चराय नमः | 23,000 | तिल, तेल, उड़द, नीला वस्त्र |
| गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा | कुम्भ | शनि | नीला | नीलम | नीली, जामुनिया, लजावर्त | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | चाँदी, प्लैटिनम | मध्यमा | शनिवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ शं शनैश्चराय नमः | 23,000 | तिल, तेल, उड़द, काले वस्त्र |
| दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची | मीन | गुरु | पीला | पुखराज | टोपाज सुनहला | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, चाँदी पंचधातु | तर्जनी | गुरुवार | प्रातः 5 से 10 बजे | ॐ बृं ब्राहस्पतये नमः | 19,000 | चने की दाल, हल्दी, पीला वस्त्र |
| ---- | राहू | ---- | ---- | गोमेद | ---- | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, चाँदी | मध्यमा | शनिवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ रां राहवे नमः | 18,000 | तिल, तेल, नीला वस्त्र |
| ---- | केतु | ---- | ---- | लहसुनिया | ---- | सवा 3, 5, 7, 9, 11 रत्ती | सोना, चाँदी | मध्यमा | बुधवार | सायं 6 से 8 बजे | ॐ कें केतवे नमः | 17,000 | सप्तधान्य, नारियल, धूम, वस्त्र |
नोट
किसी भी ग्रह का बल कम हो अथवा अंश कम होने पर पॉवर बढ़ाने के लिए रत्न धारण करना चाहिए। जन्म कुंडली के जन्म चक्र में समय समय पर महादशा-अंतर्दशा जो चल रही है उसी के अनुसार रत्न धारण करना चाहिए। ऐसा करने से हमेशा लाभप्रद रहेगा।
अपने नमाक्षर या जन्म राशि के द्वारा भी रत्न को धारण कर सकते हैं। जन्म कुंडली में जन्मचक्र समयानुसार बदलता रहता है अतः रत्नों को समयानुसार बदलते रहना चाहिए।
स्वयं रत्न धारण करने की विधि
सर्वप्रथम किसी भी रत्न को धारण करने से पहले (निर्धारित दिन के पहले) रात में गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर रत्न की अंगूठी को रात भर छोड़ दें।
प्रातः गंगाजल से धोकर घर के पूजन स्थान में ईश्वर के समक्ष रखकर अगरबत्ती-धूप से पूजा करें तथा पूरब की ओर मुख करके अंगूठी को जिस अंगुली में पहनना है, उस अंगुली के ऊपर रखकर दूसरे हाथ से ढककर ध्यान करें।
ध्यान करें कि आप अपने इष्ट देव के सामने हैं और उनसे प्रकाश की किरण निकल रही है जो आपकी सभी परेशानियों का समाधान कर रही है।
अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें और रत्न धारण करने के पश्चात संबंधित बीज मंत्र का जाप 11, 51 या 108 बार करें।
